गुरुवार, 11 अक्तूबर 2007

गुस्ताखी-माफ!

बहुत हो गया!जब भी उस ऊपरवाले के बारे में किसी से कोई सवाल करता हूं,तो ये नीचे वाले मुझे मर्खनी गाय की तरह से घूरते हॆ.कोई मुझे अधर्मी कहता हॆ,तो कोई पापी.कई तथाकथित धर्मात्मा तो मेरी परछाई से भी दूर भागते हॆ.एक-दो हॆं,जो कहते हॆं,मेरे सवाल तो उचित हॆ, लेकिन वे खुले रुप से मेरा समर्थन नहीं कर सकते.इसलिए मॆंनें निर्णय किया हॆ कि अपने सवालों को एक डायरी में उतारूगा.जीते जी न सही,मरने के बाद तो इन सवालों पर किसी की नजर पडेगी. क्या इन स्वयंभू
भक्तों के, उस ऊपरवाले के संबंध में कोई सवाल करना बहुत बडा अपराध हॆ? गुस्ताखी माफ?

2 टिप्‍पणियां:

Suman ने कहा…

nice

ZEAL ने कहा…

ऊपर वाले से सवाल करना कतई गुनाह नहीं है। हमारे प्रश्नों का जवाब सिर्फ उसी के पास है । आप पूछते रहिये। यकीन मानिए आपको जवाब मिलता रहेगा।